सीधा, सरल जो मन मेरे घटा

सागर में एक बूँद

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दोहरी होती हर चीज़ - द्वंद्व

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दोहरी होती गयी
हर चीज़
दोहरी होती
जिंदगी के साथ.
आस्थाएं, विश्वास, कर्त्तव्य
आत्मा और
फिर उसकी आवाज.
एक तार को
एक ही सुर में
छेड़ने पर भी
अलग-अलग
परिस्थितियों में
देने लगा
अलग-अलग राग,
जैसे वोह कोई और था
और यह है
और कोई साज़.
अपने से द्वंद्व करते-करते
खत्म करता रहा
अपने ही दो हिस्से
और झपटता रहा
स्वयं पर ही
बन कर
चील, गिद्ध और बाज़.

दीपक कुमार श्रीवास्तव

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19 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

kbbisaria के द्वारा
May 12, 2010

अप[की कविता केवल बुद्दिजीवियो के लिए है. आपसे से रेकुएस्ट है की कोई भी कविता सरल भासा में या दुसरे शब्दों में में लालू यादव वाली भासा में ही लिखे आप अवश्य पोपुलर होंगे ऐसी मेरी शुभकामाएं हैं बिसारिया

    atulsingh के द्वारा
    June 3, 2010

    Thanks Atul ji for taking time to read it. I am not a poet rather i simply express what i feel and what happens within me if it is called a poem i feel proud. but compliments motivate to carry on the journey. Deepak Srivastava

    rajlaxmi के द्वारा
    July 2, 2010

    बिसारिया जी ये एक अच्छी रचना है.

Rajkumar के द्वारा
May 3, 2010

सुन्दर अभिव्यक्ति है यह कविता मन के अंतर्द्वंद्वों की. लगा जैसे कोई मेरे ही मन की कहानी कह रहा हो.

    deepaksrivastava के द्वारा
    July 2, 2010

    धन्ह्याबाद.

R.K.Mishra के द्वारा
May 3, 2010

अच्छा लिख रहे हो लिखते रहो

    deepaksrivastava के द्वारा
    July 2, 2010

    protsahan ke liye शुक्रिया.

Satyanarain के द्वारा
May 3, 2010

fantastic poetry. i liked it very much.

    deepaksrivastava के द्वारा
    July 2, 2010

    thanks.

Suprabha के द्वारा
May 3, 2010

बहुत अछे

    deepaksrivastava के द्वारा
    July 2, 2010

    जी छोटा सा प्रयास है बस.

Rajlaxmi Srivastava के द्वारा
May 3, 2010

आप ऐसे ही लिखते रहिये सुकून दायक है.

    deepaksrivastava के द्वारा
    July 2, 2010

    कोशिश करूँगा. शुक्रिया.

Vinod Chauhan के द्वारा
May 3, 2010

मन की व्यथा काव्य रूप में इससे अधिक सटीक नहीं हो सकती.

    deepaksrivastava के द्वारा
    July 2, 2010

    मेरी रचना को पढने के लिए समय देने के लिए धन्यवाद.

Ashish Pandey के द्वारा
May 3, 2010

A good hand on human feelings.

    deepaksrivastava के द्वारा
    July 2, 2010

    thanks for compliments.

G.D. SANWAL के द्वारा
May 3, 2010

ऐसा लगा जैसे मेरे मन की दशा की कहानी है ।

    deepaksrivastava के द्वारा
    July 2, 2010

    अच्छी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद सनवाल जी.


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