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कीचड उछालो किस्मत चमकाओ - किस्सा-ए-नई राजनीति

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विगत एक या शायद दो दशकों से अपने राजनीतिक करिअर को चमकाने के लिए एक नयी युक्ति प्रयोग में लाई जा रही है. वो चाहे राष्ट्रपिता को गाली देना हो, या अपने राष्ट्र को. दुश्मन देश की हिमायत हो, आतंकवादियों, राष्ट्रद्रोहियों की हिमायत हो या अलगाववादी झलक वाली बयानवाजी. अपने नाम को सुर्ख़ियों में लाने के लिए या सिर्फ वोट के लिए तुस्टीकरण की राजनीति ही है. इसके उदाहरण एक ढूँढो पचास मिल जायेंगे. इस समय कश्मीर को लेकर भी ऐसा ही किया जा रहा है. फिर वो वयान चाहे किसी का हो, बयान के पीछे छिपे निहितार्थ का आंकलन किया जा सकता है. ठीक इसी तरह की किसी घटना की प्रतिक्रियास्वरूप कभी मैंने चार लाईने लिखी थीं, जो मुझे लगता है की आज इस प्रबुद्ध मंच को अवश्य समर्पित की जानी चाहिए.

हे राष्ट्रपिता, महात्मा गाँधी,
तुम हो कितने महान,
हम सब कितने बौने हैं,
तुम कितने आलीशान.
वो,
जिन्होंने दी थी,
तुम्हें सरेआम गाली.
उन्हीं से,
तुमने मुस्कुराते हुए,
माला गले डलवा ली.
वाकई, बापू
तुम आज भी महान हो
हम सब कितने बौने हैं.
तुम कितने आलीशान हो.

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17 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bhaijikahin by ARVIND PAREEK के द्वारा
November 3, 2010

प्रिय श्री दीपक जी, बहुत सुंदर अभिव्‍यक्ति है, आपनें ठीक लिखा है । मिश्रा जी ने जो कहा वही मैं कहना चाहता हूँ कि सूरज और चांद पर थूकने से थूक अपने ही मुंह पर गिरता है ।  अरविन्‍द पारीक

    November 3, 2010

    प्रिय भाई अरविन्द जी, आपकी प्यारी सी प्रतिक्रिया के लिए आभारी हूँ. धन्यवाद और दीपावली की शुभकामनाएं आपके और आपके परिवार के लिए. शुभेच्छु, दीपक श्रीवास्तव.

kmmishra के द्वारा
November 2, 2010

वो, जिन्होंने दी थी, तुम्हें सरेआम गाली. उन्हीं से, तुमने मुस्कुराते हुए, माला गले डलवा ली. वाह वाह कहने को जी कहा । सूरज और चांद पर थूकने से थूक अपने ही मुंह पर गिरता है । देखने वाले उसे देख कर मजा लेते हैं और थूकना वाला सोचता है कि उसे ख्याति प्राप्त हुयी । आभार ।

    November 2, 2010

    साहित्य को यदि एक विशाल उपवन की संज्ञा दी जाए तो मेरी हैसियत उस उपवन के किसी वृक्ष के फुनगे सदृश भी नहीं. जब आपके जैसा कोई दक्ष ब्लॉगर और साहित्यकार मेरे ब्लॉग पर एक सुन्दर प्रतिक्रिया दे, इससे अच्छा दीपावली का उपहार मेरे लिए और क्या हो सकता है. धन्यबाद. और हाँ मैं तो भूल ही गया मेरी तरफ से आपको और सभी प्रबुद्ध ब्लॉगरस को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं.

abodhbaalak के द्वारा
November 2, 2010

दीपक जी, आज समाज में कुछ ऐसा ही होता दिखाई दे रहा है, कुछ पल की ख्याति के लिए लोग तरह तरह की नौटंकी करते आपको टीवी पर नज़र आ जायेंगे. सराहनीय रचना के लिए बधाई हो http://abodhbaalak.jagranjunction.com

nishamittal के द्वारा
November 2, 2010

विवादित बोल चर्चा में आना तो आज एक नया फंडा है लोकप्रियता हासिल करने का.

    November 2, 2010

    एक कहावत है – बदनाम हुए तो क्या नाम नहीं होगा. लोकप्रियता मिलनी चाहिए कैसे भी मिले, बस यही लक्ष्य है आज की राजनीति का. प्रतिक्रया के लिए शुक्रिया, निशा जी.

    November 2, 2010

    दीवाली की बहुत बहुत बधाइयाँ प्राप्त करें.

s.p.singh के द्वारा
November 2, 2010

प्रिय दीपक बधाई, बापू क्या ? लोग तो अपने मतलब के लिए अपने जन्दाता को भी गलियां दे देते हैं यह भारत है यहाँ सब कुछ संभव है. ” Its can happen only in India ” धन्यवाद

    November 2, 2010

    और हम कहते हैं, मेरा भारत महान. यह यूज़ एंड थ्रो की नीति है. प्रतिक्रया के लिए धन्यबाद, सिंह साहेब.

    November 2, 2010

    दीवाली की हार्दिक शुभकामनाएं, सिंह साहेब आपको और आपको पूरे परिवार को.

Piyush Pant, Haldwani के द्वारा
November 1, 2010

वाकई, बापू तुम आज भी महान हो हम सब कितने बौने हैं. तुम कितने आलीशान हो सुंदर लेख हार्दिक बधाई……

    November 1, 2010

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यबाद, पीयूष जी. ये पंक्तियाँ उस राजनेता/ राजनेत्री पर लिखी थी जिसने गांधीजी को गाली देकर राजनीतिक रोटियाँ सेंकी और फिर राजनीति का शिखर प्राप्त किया.

    November 1, 2010

    और जब उस कथित राजनीति-पटु शख्शियत ने बापू की मूर्ति पर माल्यार्पण किया तो ये उदगार व्यक्त हुए.

    November 2, 2010

    पीयूष जी और उनके पूरे परिवार को मेरी और से दीपावली की बहुत बहुत शुभकामनाएं.


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